मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव
मथुरा में, विशेषकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में, जन्माष्टमी का उत्सव अद्वितीय होता है।
अभिषेक और श्रृंगार: मध्यरात्रि में, ठीक उसी समय जब कृष्ण का जन्म हुआ था, गर्भगृह में उनका अभिषेक किया जाता है। इस दौरान दूध, दही, शहद, घी और जल से भगवान को स्नान कराया जाता है। इसके बाद, उन्हें सुंदर वस्त्र और सोलह श्रृंगार से सजाया जाता है।
झांकियां और रासलीला: मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। जगह-जगह कृष्ण के जीवन से जुड़ी भव्य झांकियां और रासलीलाओं का आयोजन होता है, जिसमें पेशेवर कलाकार भाग लेते हैं।
यमुना आरती: विश्राम घाट पर होने वाली यमुना आरती भी इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंस का वध करने के बाद कृष्ण ने इसी घाट पर विश्राम किया था।
वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव
वृंदावन में, खासकर बांके बिहारी मंदिर में, जन्माष्टमी का त्योहार खास तरीके से मनाया जाता है।
मंगला आरती: बांके बिहारी मंदिर में साल में केवल एक बार, जन्माष्टमी की रात को मंगला आरती होती है। इस आरती को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। यह रात करीब 12 बजे शुरू होती है।
नंदोत्सव: जन्माष्टमी के अगले दिन, जिसे नंदोत्सव कहते हैं, नंद बाबा के घर में कृष्ण का जन्म उत्सव मनाया जाता है। भक्त और पुजारी एक-दूसरे पर मिठाइयां, फल और सिक्के लुटाते हैं और गीत गाकर जश्न मनाते हैं।
मंदिरों की सजावट: वृंदावन के सभी मंदिर, जैसे इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर, जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से सजाए जाते हैं। भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे दिन चलते रहते हैं।